बाबा (राजकुमार श्यामानन्द सिंह) की याद में …

अंकुर बीप्लव द्वारा आज सुबह जब रियाज़ कर रहा था, उसी वक़्त  मुझे अपने बचपन की याद आ गई जब मैं अपने दादा जी से मिलने देवघर  (झारखण्ड ) गया था और वहां दादी माँ के कैसेटों के संकलन से सुबह -सुबह जौनपुरी की बंदिश ऐ रि फिरत एक दमदार आवाज़ में सुना. उस वक़्त […]